Our Spiritual Journey
A Legacy of Devotion through Music
About Sharma Bandhu
Sharma Bandhu
सन 2004 से हम चारों भाई, शर्मा बंधु, भक्ति गायन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। हम चारों—पंडित राजीव शर्मा, मुकेश शर्मा, शैलेश शर्मा एवं मिथलेश शर्मा—संगीत में पोस्ट ग्रेजुएट हैं। बचपन से ही हमें हमारी माता, श्रीमती विद्या देवी शर्मा, से संगीत के संस्कार प्राप्त हुए।
हमारे पिता, पंडित श्री राम जी शर्मा, माधव संगीत महाविद्यालय में शास्त्रीय संगीत के व्याख्याता रहे हैं। उनके सान्निध्य में हजारों शिष्यों ने संगीत की शिक्षा प्राप्त की है। वे एक प्रसिद्ध संगीतकार रहे हैं, और हमें गर्व है कि हम उनके पुत्र होने के साथ-साथ उनके शिष्य भी हैं।
पिता से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद हमने अपने गुरुओं—रमाकांत दुबे जी, प्रमोद शास्त्री जी, आकाशवाणी इंदौर के संगीत प्रोड्यूसर स्वतंत्र कुमार ओझा जी तथा दिल्ली के आचार्य आर. डी. सक्सेना जी—से संगीत की उच्च शिक्षा ग्रहण की।
हमने देश के अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर भजन गायन की प्रस्तुतियां दी हैं और वर्तमान में देश-विदेश में निरंतर अपनी प्रस्तुतियां दे रहे हैं।
Meet The Brothers
Rajeev Sharma
Mukesh Sharma
Shailesh Sharma
Mithlesh Sharma
Our Vision
भजनों द्वारा हर हृदय में श्रद्धा और विश्वास जगाना।
Our Mission
भक्ति संगीत से प्रेम, शांति और श्रद्धा का प्रसार करना।
Our Purpose
संगीत से आत्मा और ईश्वर को जोड़ना।
Our Mission & Values
Our Vision
हम शर्मा बंधुओं का विजन सनातन धर्म का व्यापक प्रचार-प्रसार करना है। हम अपने भक्ति गीतों के माध्यम से प्रभु की सेवा और आराधना करते हुए जन-जन तक भक्ति का संदेश पहुँचाने के लिए समर्पित हैं, तथा अपने संगीत के जरिए हिंदुत्व और सनातन संस्कृति के मूल्यों, परंपराओं और संस्कारों को समाज में प्रसारित कर आने वाली पीढ़ियों तक हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को पहुँचाना चाहते हैं।
Our Mission
हम शर्मा बंधुओं का मिशन भक्ति संगीत को जन-जन तक सरल, मधुर और भावपूर्ण रूप में पहुँचाना है। हम अपने भजनों, संकीर्तन एवं धार्मिक प्रस्तुतियों के माध्यम से लोगों के हृदय में प्रभु के प्रति श्रद्धा, प्रेम और आध्यात्मिक चेतना जागृत करने का प्रयास करते हैं। हमारा उद्देश्य सनातन धर्म की शिक्षाओं, भारतीय संस्कृति एवं नैतिक मूल्यों को संगीत के माध्यम से समाज में स्थापित करना तथा युवाओं और आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है।